Article Title |
भागलपुर जिले (बिहार) में मक्का आधारित कृषि उद्योग की समस्याएँ एवं सम्भावनाएँ |
Author(s) | PRASHANT KUMAR, DR. PRASHANT KUMAR. |
Country | |
Abstract |
शोध सार कृषि और उद्योग के बीच बढ़ती अंतर-निर्भरता और कृषि के आधुनिकीकरण के कारण वर्तमान समय में कृषि आधारित उद्योग शब्द ने नया महत्व हासिल कर लिया है। कृषि व्यवसाय और कृषि प्रौद्योगिकी इकाइयां आधुनिक वाणिज्यिक कृषि प्रणाली में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मक्का विश्व कृषि अर्थव्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण अनाज फसलों में से एक है, जो मनुष्यों के भोजन और पशुओं के चारें दोनों के रूप में उपयोग किया जाता है। मक्का एक महत्वपूर्ण खाद्य फसल है, जिसकी कृषि देशभर में बड़े पैमाने पर की जाती है। इसका उत्पादन सभी अनाजों में सबसे अधिक है। 2013-14 में, विश्वभर में मक्के का उत्पादन 960 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक था। चावल और गेहूं के बाद, मक्का भारत में तीसरी सबसे प्रमुख फसल है। मक्का की वर्तमान उपयोग पद्धति में 51% हिस्सा कुक्कुट आहार में और लगभग 12% विभिन्न पशुपालन व्यवसायों में उपयोग किया जा रहा है। विशेष प्रकार के मक्का जैसे बेबीकॉर्न और स्वीटकॉर्न विभिन्न देशों को निर्यात किए जाते हैं । जिले में एथेनॉल उद्योग विकसित करने के लिए मक्का जैसे कृषि उत्पादों की जरूरत होती है। बिहार के भागलपुर जिले में मक्का आधारित कृषि उद्योग शीर्षक से वर्तमान अध्ययन क्षेत्र में किसानों द्वारा मक्का उत्पादन में लागत एवं रिटर्न, प्रौद्योगिकी की समस्याएँ एवं सम्भावनाओं का अनुमान लगाने के लिये किया गया है। प्रस्तुत अध्ययन में आँकड़ा विश्लेषण एवं तालिका निर्माण के लिए म्गबमस का प्रयोग किया गया है। इसके लिए प्राथमिक एवं द्वितीयक स्रोतों से आँकड़े एकत्रित किए गए हैं, जो व्यक्तिगत सर्वेक्षण के अनुभवों के आधार पर भागलपुर जिले में मक्का आधारित कृषि उद्योग का भौगोलिक अध्ययन किया गया है, ताकि मक्का आधारित कृषि उद्योग के जरिए क्षेत्र का विकास सम्भव हो सके। मुख्य शब्द : कृषि उद्योग, कृषि व्यवसाय, उत्पादन, प्रौद्योगिकी, व्यवसाय। |
Area | Agricultural Geography |
Published In | Volume 2, Issue 1, March 2025 |
Published On | 27-03-2025 |
Cite This | KUMAR, P., & KUMAR, D. P. (2025). भागलपुर जिले (बिहार) में मक्का आधारित कृषि उद्योग की समस्याएँ एवं सम्भावनाएँ. Cosmos: A Journal of Geography, 2(1), pp. 110-118. |